Monday, September 26, 2005

आंटियों के सिर मजबूत होते हैं ?

बच्चों के मुख सी निकली कई बातें बड़ी रोचक होती हैं। अब, दो दिन पहले ही मैं अपने बेटे के साथ कार में कहीं जा रहा था कि अचानक हमसे एक छोटी सी दुर्घटना हो गई। सामने- एक स्कूटर पर एक भाईसाहब अपनी श्रीमती जी के साथ हमसे आ टकराए। आ टकराए, थोड़ा गुर्राए लेकिन कार पर प्रेस का स्टीकर देख थोड़ा मिमियाए और फिर बोले-भाई साहब, आपने तो जान ही ले ली थी। हमने हेलमेट नहीं पहना होता तो हो गया था काम।

हमने कहा-श्रीमान, ये अमेरिका नहीं, है हिन्दुस्तान। और यहां दाएं नहीं, बाएं चलने का है कानून।
बहरहाल,बात आयी-गयी हो गयी लेकिन बचुआ के मन में बैठ गई। बोला-पापा, क्या आंटियों के सिर मजबूत होते हैं?

हमने कहा-ये कैसा सवाल है बेटा, अंकल-आंटी क्या होता है।
वो बोला, स्कूटर वाले अंकल कह रहे थे कि उन्होंने हेलमेट पहना था, इसलिए बच गए। लेकिन पीछे बैठी आंटी ने तो हेलमेट नहीं पहना था लेकिन अंकल को उनकी चिंता नहीं थी।

मैंने कहा-बेटा तूने सही जाना। इसी बहाने देश के चिरकुट कानून को पहचाना। यहां एक स्कूटर पर दो आदमी बैठे तो दोनों हेलमेट पहने लेकिन पीछे औरत बैठे तो वो छुट्टा अपनी ज़ुल्फें लहराए।

मतलब साफ है-हमारे देश का कानून बनाने वालों का आई क्यू तेरे ही बराबर है। वो भी यही समझते हैं- आंटियों के सिर अंकलों से ज्यादा मजबूत होते हैं।

4 Comments:

Blogger Jitendra Chaudhary said...

यही तो बात है भैया, सारे नियम कानून जब बनाये जाते है तो इस बात का ख्याल नही रखा जाता कि वे व्यवहारिक है कि नही। अब ये तो हैलमैट का कानून बनाने वाले जाने कि उन्होने आंटियों के सिरो पर रिसर्च की थी कि नही, लेकिन एक बात तो तय है, यदि आन्टियों को भी हैलमैट पहनने के लिये मजबूर किया जाता तो, पूरे देश मे बवाल हो जाता, वो अपना नारी स्वतन्त्रता संघ वाले जगह जगह आन्दोलन करते।

9:22 PM  
Blogger eSwami said...

bahut baDhiyaa! :)

9:50 PM  
Blogger अनूप शुक्ल said...

ढपली बढ़िया बज रही है।

12:29 AM  
Blogger pooja said...

बहुत बढ़िया भैय्याजी.... इट हैपन्स ओनली इन इंडिया.....

8:19 PM  

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