Friday, September 30, 2005

स्वप्न सुंदरी का मोबाइल नंबर

भाईयों और भाईयों की बहनों,

कल अपन नेट पर इधर-उधर भटके तो एक साइट पर दिलचस्प टिप्पणी पर जा अटके। कोई बालक था अंजाना, ऐश्वर्या का दीवाना। वो लगा हमें नादान,लेकिन उसका था एक प्यारा सा अरमान। बालक ने लिखा था- मैं मांगता हूं मन्नत एक दिनभर, कहीं से मिल जाए ऐश्वर्या का नंबर।

तो भईया, हमें लगा कि हो सकता है कि बालक की तरह ऐश्वर्या के कई दूसरे चाहने वालों को भी उसके नंबर की तलाश हो। तो लीजिए जनाब.....इस खूबसूरत सुंदरी का नंबर हम दिए देते हैं।

लेकिन..अब जब मैं नंबर दे ही रहा हूं तो एक खेल खेल लेते हैं। अपन आपको ऐश के मोबाइल के नंबर के 10 डिजीट में से 6 डिजीट दिए देता हूं। बाकी चार आप जोड़कर बताइए। पंद्रह दिन बाद सही जवाब देने वालों को हमारी तरफ से एक खास पुरस्कार दिया जाएगा। और हां..सही नंबर तो बताया ही जाएगा।

लीजिए नंबर के पहले छह डिजीट हैं-982006

चलिए.अब बारी आपकी है।

Monday, September 26, 2005

आंटियों के सिर मजबूत होते हैं ?

बच्चों के मुख सी निकली कई बातें बड़ी रोचक होती हैं। अब, दो दिन पहले ही मैं अपने बेटे के साथ कार में कहीं जा रहा था कि अचानक हमसे एक छोटी सी दुर्घटना हो गई। सामने- एक स्कूटर पर एक भाईसाहब अपनी श्रीमती जी के साथ हमसे आ टकराए। आ टकराए, थोड़ा गुर्राए लेकिन कार पर प्रेस का स्टीकर देख थोड़ा मिमियाए और फिर बोले-भाई साहब, आपने तो जान ही ले ली थी। हमने हेलमेट नहीं पहना होता तो हो गया था काम।

हमने कहा-श्रीमान, ये अमेरिका नहीं, है हिन्दुस्तान। और यहां दाएं नहीं, बाएं चलने का है कानून।
बहरहाल,बात आयी-गयी हो गयी लेकिन बचुआ के मन में बैठ गई। बोला-पापा, क्या आंटियों के सिर मजबूत होते हैं?

हमने कहा-ये कैसा सवाल है बेटा, अंकल-आंटी क्या होता है।
वो बोला, स्कूटर वाले अंकल कह रहे थे कि उन्होंने हेलमेट पहना था, इसलिए बच गए। लेकिन पीछे बैठी आंटी ने तो हेलमेट नहीं पहना था लेकिन अंकल को उनकी चिंता नहीं थी।

मैंने कहा-बेटा तूने सही जाना। इसी बहाने देश के चिरकुट कानून को पहचाना। यहां एक स्कूटर पर दो आदमी बैठे तो दोनों हेलमेट पहने लेकिन पीछे औरत बैठे तो वो छुट्टा अपनी ज़ुल्फें लहराए।

मतलब साफ है-हमारे देश का कानून बनाने वालों का आई क्यू तेरे ही बराबर है। वो भी यही समझते हैं- आंटियों के सिर अंकलों से ज्यादा मजबूत होते हैं।

Saturday, September 17, 2005

कविता वीरप्पन पर

दोस्तों, अभी कुछ ही दिन पहले ही दद्दा वीरप्पन चल बसे। दद्दा इसलिए, क्योंकि मरने के बाद वो स्वर्ग या नर्क जहां भी पहुंचे होंगे, कुछ साल में हमे भी वहीं पहुंचना है। बहरहाल, वीरप्पन दद्दा चल बसे और टीवी के सभी समाचार चैनल उनके मरने की खबर पर पिल पड़े। रात दिन चहुं ओर वीरप्पन ही वीरप्पन। उसी दौरान, एक सुबह हमारा बेटा पास आया....।

एक रोज आकर हमसे बेटा बोला
धीरे से राज अपने दिल का खोला
बोला, पापा आज एक डिसीज़न लिया है
अपने कैरियर का फैसला किया है
हमने पूछा,
बताओ, ज़िंदगी में क्या बनना चाहते हो
उसका जवाब हमारे लिए उसी तरह अप्रत्याशित था,जैसे
झूमते शराबी के लिए गटर या गढ्ढा
बोला, पापा जानी....मेरा रोल मॉडल है असली अब तक छप्पन का हीरो,
हमने कहा नाना पाटेकर
उसने हमारी नासमझी को माफ करते हुए अंदाज में कहा,
असली का मतलब नहीं समझते आप
अब तक छप्पन- मतलब वीरप्पन
अब हमारी सनक गयी खोपड़ी
सुबह सुबह क्यों ये ध्वस्त कर रहा है अपने कैरियर की झोपड़ी
मन तो आया दें साले में एक झापड़
बना दें मार मार कर उल्लू का पापड़,
लेकिन आजकल के लौडें खतरनाक होते हैं,
मारने की बात भी करो तो मानवाधिकार का रोना रोते हैं,
हमने अपने दिल को समझाया,
नादान है, अंजान है
बेटा, कुछ और बनो... डाकू क्यों बनना चाहते हो.....
अब वो गुर्राया, ख़बरदार गब्बर........... वीरप्पन अंकल को डाकू मत बोल
वो महान, देशभक्त और जाबांज इंसान की पहचान थे
सुनकर ये उपमाएं, तन गयी अपनी भृकुटियां, बदल गयी भंगिमाएं
बोले, उल्लू के पट्ठे,वीरप्पन कब से तेरा अंकल हो गया,
डकैती तेरे बाप दादा ने भी कभी डाली है क्या, जो वीरप्पन तेरा चाचा हो गया
और देशभक्त वो नालायक कब से हो गया ?
गोली मार दी गयी है उसे..अब पता भी नहीं चलेगा कहां नाम ये खो गया
लेकिन छोरे पर तो जैसे वीरप्पन का भूत सवार था....
और हमारा हर वार बेधार था,
बोला, वीरप्पन अंकल तो हमेशा ही देशभक्त रहे ,
अंदर से नरम और बाहर से सख्त रहे,
देखा नहीं था आपने,राजकुमार साहब की किडनैपिंग के वक्त
उनकी सबसे पहली मांग क्या थी जानी
अपने राज्य के लिए कावेरी का पानी
और कौन कहता है नहीं मारी जाती देशभक्तों को गोली
महात्मा गांधी, राजीव गांधी, इंदिरा गांधी, अब्राहम लिंकन..ये क्या देशभक्त नहीं थे
हमने कहा पागलों जैसी बाते मत करो,
बनना ही है तो शाहरुख जैसा कुछ करो
फिल्मों से लाखों पीटो और ढेरों एड फिल्में करो
गाढ़ों झंडे लोकप्रियता के और बाप का नाम रोशन करो
वो बोला, वीरप्पन के आगे शाहरुख की क्या औकात
उसकी हंसी नकली, रोना नकली, नकली है हर बात
और....उस पर तान दो असली बंदूक..... तो.कर देगा????
उल्टी...
लेकिन वीरप्पन अंकल
उफ..पापा, जंगल, पहाड़, बदूंक और पुलिस..वाऊ..हाऊ एडवेंचरस
बंद कर बकवास...मैं चिल्लाया
फिर पलटा खाया,खींचे निपोरी और तर्क पर उतर आया
बोला..वीरप्पन के पास एक भी एड फिल्म थी क्या..
वो बोला,चांस नहीं मिला उन्हें, नहीं तो किसी माई के लाल से कम थे क्या
अगर कर देते किसी भी प्रोडक्ट की अंकल मॉडलिंग
गारंटी है रातों रात हिट हो जाता प्रोडक्ट डॉर्लिंग
सोचो पापा, अंकल चढ़ के किसी बाइक पर गर ऐलान कर देते
"मंगलम के जंगलम में देता हूं पुलिस को गच्चा, ये बाइक है साथी मुसीबतों का सच्चा"
तो कोई रोक सकता था भला बाईक को हिट होने से
अब मैं घबराया..लेकिन फिर दिल को समझाया
शायद बचुआ बड़े होकर संभल जाए
टीवी पर दिखायीं गई वीरप्पन की कहानियों का भूत उतर जाए
वो-
वीरप्पन बनने का ख्वाब छोड़ दे
और वीरप्पन का भी बाप यानी नेता बन जाए...नेता बन जाए।

आदाब जनाब...

अपनी ढपली लेकर मैं पुरु ब्लॉग संसार में हाज़िर हूं। भईया, अपनी ढपली है तो अपना ही राग सुनाएंगे। मन में जो होगा सो बताएंगे। फिलहाल तो ये ब्लॉग बनाया है, इसलिए आज कुछ नहीं...कल से यहां अपना बाजा बजाएंगे।
पुरु