Wednesday, December 21, 2005

रिएलिटी शो के पक्ष में

आलोचकों का तर्क है कि फेम गुरुकुल और इंडियन आईडल जैसे रिएलिटी शो युवाओँ को भ्रमित कर रहे हैं। ऐसे शो के चक्कर में फंसकर नए कलाकार बर्बाद हो रहे हैं,जबकि इनामी शो दर्शकों को मुफ्तखोर बना रहे हैं। आलोचकों का यह भी कहना है कि धन के लालच में टेलीविजन चैनल रिएलिटी शो में बेवजह नाटकीय मोड़ पैदा करते हैं और कई बार शो के निर्माता अपने फायदे के लिए कलाकारों के बीच गलतफहमियां तक पैदा करा देते हैं।

आलोचकों के निशाने पर टेलीविजन चैनल, रिएलिटी शो बनाने वाले निर्माता, शो में हिस्सा लेने वाले कलाकार और दर्शक सभी शामिल हैं। ऐसा भी नहीं है कि ये आलोचना सिर्फ इंडियन आईडल,फेम गुरुकुल या सारेगामापा जैसे संगीत आधारित कार्यक्रमों तक ही सीमित हो। आलोचकों का हथौड़ा कौन बनेगा करोड़पति से लेकर अंताक्षरी, बुगी बुगी, छप्पर फाड़ के, छुपा रुस्तम,हर्षा की खोज और सिने स्टार की खोज जैसे तकरीबन सभी रिएलिटी शो पर गिरता रहा है। दिलचस्प बात ये है कि रिएलिटी शो की सार्थकता को लेकर जितनी तेजी से सवाल उठाए जा रहे हैं, उतनी ही तेजी से टेलीविजन चैनलों पर वो अपनी जगह बना रहे हैं।

ऐसे में ये सवाल उठना लाज़िमी है कि आखिर रिएलिटी शो क्या बला है और उनमें ऐसा क्या है कि दर्शक उन्हें सिर आंखों पर बैठा रहे हैं? साधारण शब्दों में कहें तो रिएलिटी शो वो कार्यक्रम हैं, जिनमें हिस्सा लेने वाले प्रतियोगी या कलाकार एक वास्तविक परिस्थिति में कैमरे का सामना करते हैं और चुनौतियों का स्वभाविक अंदाज में प्रतिउत्तर देते हैं। इन कार्यक्रमों में रीटेक यानि दुबारा दृश्य फिल्माने की छूट और स्क्रीप्ट जैसी कोई चीज़ अमूमन नहीं होती।

जहां तक रिएलिटी शो की सफलता का सवाल है, तो इसकी पड़ताल करने पर एक मुख्य वजह सामने आती है। वो यह कि ऐसे कार्यक्रमों के प्रसारण में सभी का फायदा है। एक सफल रिएलिटी शो टेलीविजन चैनल के दोनों हाथ में लड्डू रखता है। चैनल की आय मुख्य तौर पर कार्यक्रम के बीच मे दिखाए जाने वाले विज्ञापनों से होती है। इन शो की लोकप्रियता जहां चैनलों द्वारा वसूले जाने वाली विज्ञापनों की दर में इजाफा करती है, वहीं शो से दर्शकों के जुड़ाव की चलते कमाई के दूसरे साधन भी मुहैया कराती है। मसलन, मोबाइल के जरिए भेजे जाने वाले एसएमएस से चैनल को एक कार्यक्रम के दौरान करोड़ों रुपये की अतिरिक्त आय होती है। फेम गुरुकुल का ही जिक्र करें तो दर्शकों ने फेम जोड़ी चुनने के लिए कार्यक्रम के दौरान तकरीबन पांच करोड़ एसएमएस और कॉल किए। मोबाइल कंपनियां इन कार्यक्रमों के लिए भेजे जाने वाले एक एसएमएस की कीमत तीन से पांच रुपये तक वसूलती है। इस कमाई में समझौते के आधार पर 40 से 50 फीसदी के आधार पर बंटवारा होता है। इसका मतलब ये कि फेम गुरुकुल के दौरान चैनल ने तकरीबन पांच करोड़ रुपये (अनुमान के मुताबिक) बिना कुछ किए धरे ही कमा लिए। दूसरी तरफ, मोबाइल कंपनियों के लिए तो ये सौदा हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा सरीखा है,जबकि विज्ञापन प्रदाता कंपनियां भी लोगों के उत्साह से खुश रहती हैं।

रिएलिटी शो में हिस्सा लेने वाले प्रतियोगियों का फायदा जगजाहिर है। विजेताओं की तो पौ बारह होती ही है लेकिन हारने वाले कुछ प्रतियोगियों की किस्मत भी ये शो खोल रहे हैं। उदाहरण के लिए इंडियन आईडल प्रतियोगिता के टॉप आठ प्रतियोगी इन दिनों एलबम और स्टेज शो में व्यस्त हैं। इसी प्रतियोगिता के तीसरे चरण में बाहर हुए उम्मीदवार अमित टंडन तो बतौर मुख्य अभिनेता एक धारावाहिक में नज़र आ रहे हैं।फेम गुरुकुल के प्रतिभाशाली छात्रों की किस्मत भी चमकने के आसार हैं। इसी तरह, इन दिनों जी टीवी के सारेगामापा कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे दो प्रतियोगियों को मुकाबले का नतीजा निकलने से पहले ही फिल्मों के गाने का मौका मिल चुका है।

इनामी कार्यक्रमों के दौरान तो दर्शकों के लिए भी कुछ न कुछ पाने का इंतजाम किया जाता है। हालांकि, इनामी रिएलिटी शो कही न कहीं दर्शकों में मुफ्तखोरी की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहे हैं, ये तर्क कुछ हद तक सही है लेकिन दूसरी तरफ ये कार्यक्रम लाखों दर्शकों के लिए कहीं न कहीं सास-बहू के झगड़ों में उलझे धारावाहिकों से मुक्ति का जरिया भी है। यही वजह है कि केबीसी, ईडियन आईडल, फेम गुरुकुल और छुपा रुस्तम समेत तकरीबन 80 फीसदी रिएलिटी शो दर्शकों ने खूब पसंद किए।

रिएलिटी शो के चक्कर में पड़कर युवा बर्बाद हो रहे हैं, बिलकुल बेतुका तर्क है। श्रेषा घोषाल और सुनिधि चौहान जैसे प्रतिभाशाली गायिकाएं इन रिएलिटी शो की ही देन है। काज़ी तौकीर,रुपरेखा बैनर्जी अभिजीत सावंत, राहुल वैद्य, और अमित साना जैसे मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चों के लिए क्या एक करोड़ रुपये और अपना म्यूजिक एलबम निकालने का सपना देखना भी आसान है? इस कड़ी में दो जून की रोटी के लिए जद्दोजहद करने वाले पेंटर रवीन्दर रवि को कौन भूल सकता है, जो इंडियन आईडल की वजह से आज स्टेज शो कर कमा रहा है। कौन बनेगा करोड़पति में एक दूधिया द्वारा पच्चीस लाख रुपये जीतने की घटना भी उल्लेखनीय है। आलोचकों को ये मानना चाहिए कि कहीं न कहीं ये रिएलिटी शो प्रतिभाशाली युवाओं को एक मंच भी मुहैया कराते हैं। ये बात सिर्फ नाच-गाने या अभिनय से जुड़े कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। उदाहरण के लिए, ईएसपीएन चैनल ने जब हर्षा की खोज नामक शो से कमेन्टेटर की तलाश शुरु की तो पहले राउंड में हजारों युवाओं ने हिस्सा लिय। इसी तरह नेशनल जोग्राफिक चैनल ने मिशन एवरेस्ट नाम से रिएलिटी शो शुरु किया तो इसमें भारतीय और नेपाल सेना के जवानों के अलवा पांच आम भारतीय भी चुने गए। इन पांच उम्मीदवारों के लिए तीस हजार से भी ज्यादा लोगों ने अपनी दावेदारी पेश की। ये कार्यक्रम जबरदस्त हिट हुआ। खास बात ये भी है कि विशेष प्रायोजन से शुरु किए गए रिएलिटी शो में हिस्सा लेने वाले प्रतियोगी जीत भले न पाए लेकिन उनके व्यक्तित्व में निखार तो आ ही जाता है।

ऐसा भी नहीं है कि टेलीविजन पर प्रसारित सभी रिएलिटी शो हिट ही हों। अभिनेत्री नीना गुप्ता के शो कमजोर कड़ी सरीखे कई कार्यक्रण फ्लॉप भी हुए है। दर्शक इन कार्यक्रमों से जल्दी जुड़ जाते हैं, लिहाजा टीआरपी के आंकडे जल्द ही उऩका भविष्य तय कर देते हैं। बहरहाल,सचाई यही है कि बाजार के दबाव में ही सही टेलीविजन चैनलों पर प्रसारित ये रिएलिटी शो सभी के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं।

Saturday, October 08, 2005

बाप-भाई ज़रा ध्यान दें!

भईया, दिल्ली हाईकोर्ट ने अनूठा फैसला कर डाला है। माननीय न्यायालय ने कहा है कि 15 साल की लड़की शादी लायक होती है। इतना ही नहीं,अगर वो अपनी मर्ज़ी से शादी करती है,तो किसी के बाप में इतनी ताकत नहीं कि उसे गैरकानूनी कहे (हमारे शब्दों में व्याख्या)। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्यार अंधा होता है,लिहाजा प्यार पर किसी का जोर नहीं। कोर्ट ने अपने फैसले में मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है, जैसी पंक्ति का भी इस्तेमाल किया है।कुल मिलाकर कोर्ट का कहना है कि 15 साल की बालिक अपनी शादी का फैसला कर सकती है और अगर वो अपनी मर्जी से किसी शख्स से शादी करती है, तो वो वाजिब और कानूनी है। अब, फैसला आ गया है तो वो बाप और भाई जरा सावधान हो जाएं, तो अपनी बेटियों और बहनों को छोटी नादान समझकर चिंता नहीं कर रहे थे। इसके अलावा, उनके पास पुलिस की मदद लेने का विकल्प भी खुला था। अब,आपने शिकायत की...तो पुलिस आप को ही धर लेगी।

कोर्ट का ये फैसला कर दिया लेकिन कुछ साल देरी से। कुछ साल पहले कर दिया होता तो वो बचपन की मुहब्बत हमें भी नसीब हो गई होती...। बचपन में हमने तीन बार प्रेम किया और हर उम्र से जुड़ा कुछ लफड़ा हमारे साथ हो गया। हमारी पहली प्रेमिका ने ये कहकर मना कर दिया कि वो अभी शादी लायक नहीं है। दूसरी प्रेमिका ने कहा कि अगर शादी की तो भईया मेरे तो हाथ पैर तोड़ ही देंगे, तुम्हारी भी जान ले लेंगे। पहले दो अनुभवों से सबक लेकर हमने जब तीसरी प्रेमिका का चुनाव किया तो सभी बातों का पूरा ख्याल रखा था..लेकिन उसमें भी लोचा हो गया।दरअसल,तीसरी प्रेमिका के बालिग होने का इंतजार करते करते इतना वक्त बीत गया कि वो एक सिलेंडर बेचने वाले के साथ भाग गई।

कोर्ट ने ये शानदार फैसला अब दिया है,तो अपने जैसे सैकड़ों प्रेमी इसका स्वागत ही करेंगे।

Friday, September 30, 2005

स्वप्न सुंदरी का मोबाइल नंबर

भाईयों और भाईयों की बहनों,

कल अपन नेट पर इधर-उधर भटके तो एक साइट पर दिलचस्प टिप्पणी पर जा अटके। कोई बालक था अंजाना, ऐश्वर्या का दीवाना। वो लगा हमें नादान,लेकिन उसका था एक प्यारा सा अरमान। बालक ने लिखा था- मैं मांगता हूं मन्नत एक दिनभर, कहीं से मिल जाए ऐश्वर्या का नंबर।

तो भईया, हमें लगा कि हो सकता है कि बालक की तरह ऐश्वर्या के कई दूसरे चाहने वालों को भी उसके नंबर की तलाश हो। तो लीजिए जनाब.....इस खूबसूरत सुंदरी का नंबर हम दिए देते हैं।

लेकिन..अब जब मैं नंबर दे ही रहा हूं तो एक खेल खेल लेते हैं। अपन आपको ऐश के मोबाइल के नंबर के 10 डिजीट में से 6 डिजीट दिए देता हूं। बाकी चार आप जोड़कर बताइए। पंद्रह दिन बाद सही जवाब देने वालों को हमारी तरफ से एक खास पुरस्कार दिया जाएगा। और हां..सही नंबर तो बताया ही जाएगा।

लीजिए नंबर के पहले छह डिजीट हैं-982006

चलिए.अब बारी आपकी है।

Monday, September 26, 2005

आंटियों के सिर मजबूत होते हैं ?

बच्चों के मुख सी निकली कई बातें बड़ी रोचक होती हैं। अब, दो दिन पहले ही मैं अपने बेटे के साथ कार में कहीं जा रहा था कि अचानक हमसे एक छोटी सी दुर्घटना हो गई। सामने- एक स्कूटर पर एक भाईसाहब अपनी श्रीमती जी के साथ हमसे आ टकराए। आ टकराए, थोड़ा गुर्राए लेकिन कार पर प्रेस का स्टीकर देख थोड़ा मिमियाए और फिर बोले-भाई साहब, आपने तो जान ही ले ली थी। हमने हेलमेट नहीं पहना होता तो हो गया था काम।

हमने कहा-श्रीमान, ये अमेरिका नहीं, है हिन्दुस्तान। और यहां दाएं नहीं, बाएं चलने का है कानून।
बहरहाल,बात आयी-गयी हो गयी लेकिन बचुआ के मन में बैठ गई। बोला-पापा, क्या आंटियों के सिर मजबूत होते हैं?

हमने कहा-ये कैसा सवाल है बेटा, अंकल-आंटी क्या होता है।
वो बोला, स्कूटर वाले अंकल कह रहे थे कि उन्होंने हेलमेट पहना था, इसलिए बच गए। लेकिन पीछे बैठी आंटी ने तो हेलमेट नहीं पहना था लेकिन अंकल को उनकी चिंता नहीं थी।

मैंने कहा-बेटा तूने सही जाना। इसी बहाने देश के चिरकुट कानून को पहचाना। यहां एक स्कूटर पर दो आदमी बैठे तो दोनों हेलमेट पहने लेकिन पीछे औरत बैठे तो वो छुट्टा अपनी ज़ुल्फें लहराए।

मतलब साफ है-हमारे देश का कानून बनाने वालों का आई क्यू तेरे ही बराबर है। वो भी यही समझते हैं- आंटियों के सिर अंकलों से ज्यादा मजबूत होते हैं।

Saturday, September 17, 2005

कविता वीरप्पन पर

दोस्तों, अभी कुछ ही दिन पहले ही दद्दा वीरप्पन चल बसे। दद्दा इसलिए, क्योंकि मरने के बाद वो स्वर्ग या नर्क जहां भी पहुंचे होंगे, कुछ साल में हमे भी वहीं पहुंचना है। बहरहाल, वीरप्पन दद्दा चल बसे और टीवी के सभी समाचार चैनल उनके मरने की खबर पर पिल पड़े। रात दिन चहुं ओर वीरप्पन ही वीरप्पन। उसी दौरान, एक सुबह हमारा बेटा पास आया....।

एक रोज आकर हमसे बेटा बोला
धीरे से राज अपने दिल का खोला
बोला, पापा आज एक डिसीज़न लिया है
अपने कैरियर का फैसला किया है
हमने पूछा,
बताओ, ज़िंदगी में क्या बनना चाहते हो
उसका जवाब हमारे लिए उसी तरह अप्रत्याशित था,जैसे
झूमते शराबी के लिए गटर या गढ्ढा
बोला, पापा जानी....मेरा रोल मॉडल है असली अब तक छप्पन का हीरो,
हमने कहा नाना पाटेकर
उसने हमारी नासमझी को माफ करते हुए अंदाज में कहा,
असली का मतलब नहीं समझते आप
अब तक छप्पन- मतलब वीरप्पन
अब हमारी सनक गयी खोपड़ी
सुबह सुबह क्यों ये ध्वस्त कर रहा है अपने कैरियर की झोपड़ी
मन तो आया दें साले में एक झापड़
बना दें मार मार कर उल्लू का पापड़,
लेकिन आजकल के लौडें खतरनाक होते हैं,
मारने की बात भी करो तो मानवाधिकार का रोना रोते हैं,
हमने अपने दिल को समझाया,
नादान है, अंजान है
बेटा, कुछ और बनो... डाकू क्यों बनना चाहते हो.....
अब वो गुर्राया, ख़बरदार गब्बर........... वीरप्पन अंकल को डाकू मत बोल
वो महान, देशभक्त और जाबांज इंसान की पहचान थे
सुनकर ये उपमाएं, तन गयी अपनी भृकुटियां, बदल गयी भंगिमाएं
बोले, उल्लू के पट्ठे,वीरप्पन कब से तेरा अंकल हो गया,
डकैती तेरे बाप दादा ने भी कभी डाली है क्या, जो वीरप्पन तेरा चाचा हो गया
और देशभक्त वो नालायक कब से हो गया ?
गोली मार दी गयी है उसे..अब पता भी नहीं चलेगा कहां नाम ये खो गया
लेकिन छोरे पर तो जैसे वीरप्पन का भूत सवार था....
और हमारा हर वार बेधार था,
बोला, वीरप्पन अंकल तो हमेशा ही देशभक्त रहे ,
अंदर से नरम और बाहर से सख्त रहे,
देखा नहीं था आपने,राजकुमार साहब की किडनैपिंग के वक्त
उनकी सबसे पहली मांग क्या थी जानी
अपने राज्य के लिए कावेरी का पानी
और कौन कहता है नहीं मारी जाती देशभक्तों को गोली
महात्मा गांधी, राजीव गांधी, इंदिरा गांधी, अब्राहम लिंकन..ये क्या देशभक्त नहीं थे
हमने कहा पागलों जैसी बाते मत करो,
बनना ही है तो शाहरुख जैसा कुछ करो
फिल्मों से लाखों पीटो और ढेरों एड फिल्में करो
गाढ़ों झंडे लोकप्रियता के और बाप का नाम रोशन करो
वो बोला, वीरप्पन के आगे शाहरुख की क्या औकात
उसकी हंसी नकली, रोना नकली, नकली है हर बात
और....उस पर तान दो असली बंदूक..... तो.कर देगा????
उल्टी...
लेकिन वीरप्पन अंकल
उफ..पापा, जंगल, पहाड़, बदूंक और पुलिस..वाऊ..हाऊ एडवेंचरस
बंद कर बकवास...मैं चिल्लाया
फिर पलटा खाया,खींचे निपोरी और तर्क पर उतर आया
बोला..वीरप्पन के पास एक भी एड फिल्म थी क्या..
वो बोला,चांस नहीं मिला उन्हें, नहीं तो किसी माई के लाल से कम थे क्या
अगर कर देते किसी भी प्रोडक्ट की अंकल मॉडलिंग
गारंटी है रातों रात हिट हो जाता प्रोडक्ट डॉर्लिंग
सोचो पापा, अंकल चढ़ के किसी बाइक पर गर ऐलान कर देते
"मंगलम के जंगलम में देता हूं पुलिस को गच्चा, ये बाइक है साथी मुसीबतों का सच्चा"
तो कोई रोक सकता था भला बाईक को हिट होने से
अब मैं घबराया..लेकिन फिर दिल को समझाया
शायद बचुआ बड़े होकर संभल जाए
टीवी पर दिखायीं गई वीरप्पन की कहानियों का भूत उतर जाए
वो-
वीरप्पन बनने का ख्वाब छोड़ दे
और वीरप्पन का भी बाप यानी नेता बन जाए...नेता बन जाए।

आदाब जनाब...

अपनी ढपली लेकर मैं पुरु ब्लॉग संसार में हाज़िर हूं। भईया, अपनी ढपली है तो अपना ही राग सुनाएंगे। मन में जो होगा सो बताएंगे। फिलहाल तो ये ब्लॉग बनाया है, इसलिए आज कुछ नहीं...कल से यहां अपना बाजा बजाएंगे।
पुरु